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बड़ी खबर : राजस्थान के शिक्षकों की हुई मौज, 10 हजार वरिष्ठ अध्यापक बनेंगे व्याख्याता

शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता पदों पर पिछले 3 साल से बकाया चल रही डीपीसी करने के लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। पिछले तीन सत्र 2021-22, 2022-23, 2023-24 की डीपीसी होने से करीब 10 हजार पद भर पाएंगे

शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता पदों पर पिछले 3 साल से बकाया चल रही डीपीसी करने के लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा निदेशक ने जारी अस्थायी पात्रता सूची में 2017-18 तक के 47 हजार वरिष्ठ अध्यापकों की सूची जारी करके 14 मार्च तक आपत्तियों मांगी थी। इसके बाद संयुक्त निदेशक कार्यालयों से प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण करने के लिए निदेशालय को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

निदेशालय से प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण करके स्थायी पात्रता सूची जारी की जाएगी। उसके बाद डीपीसी की बैठक में विषयवार पदों का अनुमोदन किया जाएगा। इसके बाद पदोन्नत व्याख्याताओं को स्कूलों में पदस्थापन दिया जाएगा।

राज्य के करीब 17 हजार उच्च माध्यमिक स्कूलों में वर्तमान में व्याख्याता के 21 हजार से अधिक पद रिक्त चल रहे हैं।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि राज्य में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने स्कूलों में खाली पदों को भरने के लिए कोई काम नहीं किया है। स्कूलों में व्याख्याता के पदों की स्वीकृति जारी नहीं की और न डीपीसी की गई। अब हम शिक्षा विभाग के पूरे सिस्टम को सुधार करेंगे। डीपीसी का काम शुरू हो गया है। व्याख्याता के पदों की स्वीकृति पर भी काम करेंगे।

लगभग 10 हजार पदों पर होगी डीपीसी

पिछले तीन सत्र 2021-22, 2022-23, 2023-24 की डीपीसी होने से करीब 10 हजार पद भर पाएंगे। वहीं, 1 अप्रेल 2024 से अगले सत्र की डीपीसी भी बकाया हो जाएगी। पिछले दो साल में उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत किए गए 6 हजार स्कूलों में अभी तक व्याख्याता के पदों की वित्तीय स्वीकृति शिक्षा विभाग को नहीं मिली है।

प्रत्येक स्कूल में तीन पदों के हिसाब से करीब 18 हजार व्याख्याता के पदों को मंजूरी मिलनी है। यदि विभागीय पदोन्नति से पहले शिक्षा विभाग को नवक्रमोन्नत स्कूलों में व्याख्याता पदों की मंजूरी नहीं मिली तो इन स्कूलों को व्याख्याता नहीं मिल पाएंगे।

व्याख्याता विहीन स्कूलों में अगले सत्र तक भी नहीं मिलेंगे व्याख्याता

यदि इन स्कूलों में डीपीसी से पूर्व व्याख्याता पदों की स्वीकृति नहीं होती है तो अगले शैक्षणिक सत्र की समाप्ति तक भी इन स्कूलों को व्याख्याता नहीं मिल पाएंगे, क्योंकि पद स्वीकृति के बाद सीधी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में 1 साल से अधिक का समय लगेगा। वहीं, आगामी डीपीसी में भी साल भर का समय लगेगा। ऐसे में पिछले 2 साल से व्याख्याता विहीन चल रहे स्कूलों में आगामी 2 साल तक भी व्याख्याता मिलने की कोई उम्मीद नहीं रहेगी।

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