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आख़िर गौतम गंभीर ने क्यों छोड़ दी राजनीति, जानें असली वजह 

दोस्तों पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद क्रिकेटर गौतम गंभीर ने राजनीति करनी छोड़ दी. पार्टी की और से बताया गया है कि उन्होंने अध्यक्ष जेपी नड्डा को लेटर लिखा था। गंभीर का टिकट कटना तय था।

पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद क्रिकेटर गौतम गंभीर ने राजनीति को अलविदा कह दिया है। पार्टी की तरफ से जानकारी दी गई है कि उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर बताया था कि मैं राजनीति नहीं करुगा.  इसी के साथ गौतम गंभीर ने सोशल मीडिया ट्वीटर पर कहा था कि आज से कभी राजनीति करूँगा.  

साल 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर सांसद बने लेकिन गौतम गंभीर को राजनीति में रूचि नहीं थी और वह बहुत ही कम राजनीति किया करते थे. कुछ-कुछ जगह पर वो पार्टी की तरफ से चलाए गए अभियानों व धरना प्रदर्शनों में जाते थे। गौतम गंभीर का स्थानीय स्तर पर पार्टी के  नेताओं के साथ तालमेल नहीं बैठता था. 

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जिससे शीर्ष नेतृत्व भी उनसे नाराज था। लगातार मिल रही शिकायतों और उनकी बहुत ही कम सक्रियता के बीच पार्टी नेतृत्व ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पूर्वी दिल्ली से गौतम गंभीर का टिकट काट कर नए प्रत्याशी को मैदान में लाने का फ़ैसला लिया हैं.

गौतम गंभीर नहीं लड़ेंगे लोकसभा चुनाव, बताया यह कारण 

इसी का नतीजा है कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए दिल्ली बीजेपी ने पूर्वी दिल्ली सीट के लिए प्रदेश अध्यक्ष एयरपोर्ट सचदेवा और केंद्रीय चुनाव के लिए राज्य इकाई के लिए राहुल हर्ष मंडल का नाम प्रस्तावित किया है. ऐसे में पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि गौतम गंभीर को साफ अंदाजा था कि उनका टिकट पूरी तरह से कटने वाला है. इसलिए, उन्होंने महत्वपूर्ण चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों से दूर जाने का फैसला किया।

स्थानीय विधायक के खिलाफ 

बीते कुछ वर्षो में एक कार्यक्रम के समय सांसद गौतम गंभीर का स्थानीय विधायक ओपी शर्मा के साथ लड़ाई हो गई थी. दोस्तों इस कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद थी। इस घटना के बाद भाजपा दिल्ली से जुड़े एक वर्ग ने सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शीर्ष नेतृत्व से मामले में शिकायत भी दर्ज की थी। घटना के बाद स्थानीय विधायक का कहना था कि सभी समाज के सम्मेलन में सांसद ने उनकी साथ तीखे शब्दों में बात की थी. इससे पहले भी कई बार उनके ऊपर आरोप रहे हैं कि वो स्थानीय स्तर पर पार्टी के नेताओं के साथ अलग ही तरीके से पेश आते थे. और पार्टी के आयोजनों में बहुत कम भाग लेते हैं।

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