July 24, 2008

राजसमन्द में भी बी. एस. एन. एल का ब्राडबेन्ड शुरु

बी. एस. एन. एल ने अभी कुछ रोज पहले भी हमारे जिले राजसमन्द में ब्राडबेन्ड की सेवा शुरु की है । इसके बाद तो हर उपभोक्ता के यहां नेट की स्पीड काफी अच्छी हो गई है । कुछ भी डाटा डाउनलोड करना हो तो बस मिनटों में हो जाता है । 1.5 MBPS की नेट की स्पीड मिल रही है, इस गांव जेसे कस्बे में यह तो वाकई में आश्चर्य की बात ही है ।

एक जमाना था जब हम भी 36.6 KBPS का इन्टरनल माडेम अपने कम्प्यूटर के लिए लाए थे । फिर कुछ समय बाद हमने लिया 56.6 KBPS का एक्सटरनल मोडेम जो और भी ज्यादा अच्छी स्पीड देता था और इससे कनेक्शन बार बार कटता नही् था । फिर सन 2004 मे हमारे जिले में रिलायन्स का मोबाइल आया मानसून हंगामा आफर के साथ । तब हमने भी पहली बार 112 KBPS की स्पीड का मजा पाया । तब से नेट रिलायन्स के मोबाइल पर ही चला रहे थे कि अब राजसमन्द में भी बी. एस. एन. एल का ब्राडबेन्ड शुरु हो गया । चार महिने रुकने और सबकी राय जानने के बाद हमने भी आखिर ले ही डाला बी. एस. एन. एल का ब्राडबेन्ड ।

लेन पोर्ट व वाई फाई मोडेम के विकल्प भी हैं और बी. एस. एन. एल के अलग अलग प्लान्स भी हैं । अब जिसको जैसा उचित लगे वो अपनी पसंद से वेसा प्लान चुन सकता है और हाई स्पीड इन्टरनेट का आनंद ले सकता है । हमने जो पाया वो यह है कि इसकी स्पीड वाकई में काफी तेज है और कुछ भी (आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें)

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    July 10, 2008

    चारभुजा गढ़बोर में जलझुलनी एकादशी का उत्सव

    चारभुजा गढ़बोर में जलझुलनी एकादशी का उत्सवचारभुजा गढ़बोर का मन्दिर अपने आप में बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है और मेवाड के चार धाम में से एक माना जाता है । यहां की जलझुलनी एकादशी बहुत ही प्रसिद्ध है । महाराष्ट्र, गुजराज व राजस्थान के कई स्थानों से लोग इस दिन यहां दर्शनों का लाभ लेने हेतू यहां आते हैं । राजसमंद के गांवो जेसे रीछेड, सांयो का खेडा एवं चारभुजा आदि स्थानो से कई कई लोग जो रोजगार ना या कम होने के कारण बाहर बडे शहरों की ओर पलायन कर गए, उनमें से भी वे लोग साल में इस दिन परिवार सहित यहां अपने गांव में आने को लालायित रहते हैं ।

    चारभुजा जी को मंदिर से पालकी, सवारी व गाजे बाजे के साथ, रंग गुलाल उडाते और गीत गाते हजारों की संख्या में लोग तालाब के किनारे स्थित खास स्थल पर ले कर जाते हैं जहां विधिवत स्नान व पूजा अर्चना आदि की जाती है । इस दिन चारों ओर उल्लास का माहौल होता है । औरतें गीत भजन आदि गाती हैं और नृत्य करती है और हजारो लोग भगवान चारभुजा की जय जयकार करते हुए एक विशेष तरह की (आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें)

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  • कांकरोली का साक्षी गोपाल मंदिर
  • कांकरोली का गुप्तेश्वर महादेव मंदिर
  • राजसमन्द में गणगोर महोत्सव
  • कुंभलगढ़ फेस्टिवल राजसमन्द
  • कितना जानते हैं, आप अपने राजसमन्द जिले को ?

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    श्रेणीबद्ध किये गये:- राजसमन्द जिला, उत्सव एवं त्योहार
    May 18, 2008

    राजसमन्द के ही कुछ विडियो क्लिपिंग

    काफी लोग हमारे राजसमन्द जिले के कुछ फोटो तो कुछ लोग विडीयो फुटेज वगेरह देखना चाहते हैं जो कि आसानी से हर कहीं मिलते नहीं हैं । लिजीये कुछ राजसमन्द जिले के नाथद्वारा या राजसमन्द झील के संबंधित विडीयो क्लिप देखिये जो कि अब यू ट्युब पर उपलब्ध हैं ये विडीयो राजसमन्द झील की नौ चोकी, नाथद्वारा के तंग सकरे बाजार, नो चोकी के अंबामाता मंदिर और कुंभलगढ़ किले के हैं देखिये और आनंद लिजीये ।

    राजसमन्द से कुछ आकर्षक
    विडियो क्लिपिंगः

    http://www.youtube.com/watch?v=tgCGotOtxNo

    http://www.youtube.com/watch?v=gWSypsMOu68

    http://www.youtube.com/watch?v=MvdLxuVhLu0

    http://www.youtube.com/watch?v=g-Pnio4KyLE

    http://www.youtube.com/watch?v=IuGBeleyNRQ
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    April 16, 2008

    द्वारकाप्रसाद जी सांचिहर

    द्वारकाप्रसाद जी सांचिहर का नाम भी राजसमन्द से जुडा हुआ है । वे एक विख्यात शख्सियत हैं । वैसे तो पेशे से वे गुजरात की एक युनिवर्सिटी में लेक्चरार है, पर उनकी रुचि साहित्यिक कार्यो में भी काफी हैं । सब कुछ, यहीं कांकरोली राजसमन्द में ही तो है उनका शायद इसलिए ही वे इस शहर को भुला ना पाते हैं वे श्रंगार रस के एक बेहतरीन कवि हैं । राजसमन्द राजस्थान से गुजरात तक के जीवन का सफर भी उनकी अनवरत रचनाओं को रोक नहीं पाया है ।

    नायक का नायिका से मिलन और सावन के मौसम की विशेषताओं को इंगित करती उनकी कुछ कविताएं तो बहुत ही सराहनीय है । एक बहुत ही अच्छे और सुसंस्कृत परिवार में जन्म लेने से इनकी साहित्यिक विधाओं मे रुचि काफी लम्बे समय से है, कहा जा सकता है कि द्वारकाप्रसाद जी सांचिहर श्रंगार रस के एक बेहतरीन कवि हैं । यही नही उन्होनें राजस्थानी और गुजराती साहित्य को आपस में जोडने के लिए भी अपना काफी अच्छा (आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें)

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    हार्न ओ. के. प्लीज

    टाईटल पढ़ते ही चौंक गए ना ! आप सों रहे होगें की फिर से कोई ट्रक या बस से सबंधित बात होगी पर एसा नहीं है । अक्सर ट्रकों के पीछे लिखे ये टाईटल हार्न ओ. के. प्लीज सभी को याद आते हैं । आज शाम को स्कूटर से चक्की तक जाते जाते कुछ घटना ही एसी घटित हुई की इस पर कुछ लेखनी घिसने का मानस बन ही गया । यूं तो हम हैं एक नम्बर के आलसी राम, तो इस हिसाब से अब तक जिन्दगी में गिनती की बार गेहूं को पिसवाने के लिए आटा चक्की पर ले गए होंगे, पर क्या है कि मुसिबत कह कर नहीं आती तो हमें भी जाना पडा ।

    तो साहब हम नहा धो कर आए ही थे और चक्की पर जाना पडा, इस बात से पहले ही टेंशन हो रही थी पर हमने गेहूं के कट्टे को स्कूटर के आगे रखा और स्टार्ट किया । मुश्किल से पांच मीटर की दूरी भी तय नहीं कि थी कि कोई सामने आ गया । थोडा रास्ता जाम हो गया अब कोई दूसरे लोग भी किसी के निकलने का दो पल इंतजार कर रहे हैं तो अपने को भी रूकना पडा, सडक पर पेर टिकाया ही था कि पीछे से पता नहीं कौन कम्बख्त (शायद कोई रईस जादा रहा होगा ) अपनी नई मोटरसाईकिल ले कर आ गया उसे शायद थोडी जल्दी थी । सडक संकरी थी और आस पास से कट मार कर निकलने की भी जगह नहीं थी । तो वह अपनी मोटरसाईकिल के अजीब के टाईप हार्न को बजाने लगा । बजाया ही क्या जी बार बार बजाने लगा । मेनें गुस्से में घूरते हुए पीछे मुड कर देखा एक लडका था । एक दम लेटेस्ट कपडे पहने (आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें)

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